आयुर्वेदिक दर्द निवारक काड़ा

दुनिया की किसी भी चिकित्सा पद्धति में घुटने कमर और जोड़ो के दर्द का सटीक इलाज नहीं है , लेकिन हमारे आयुर्वेद में वो शक्ति है जो जोड़ो के किसी भी प्रकार के दर्द को जड़ से समाप्त कर सकती है. आपके घुटनो कमर और जोड़ो में कैसा भी दर्द हो इसे मात्र सात दिनों में कम करने का अचूक नुस्खा हे आयुर्वेदिक दर्द निवारक काढ़ा चूर्ण, कई लोग कहते है की घुटनो की ग्रीस ख़त्म हो गए इसलिए हमें दर्द हो रहा है या फिर यूरिक एसिड का शरीर में जयादा बढ़ जाना भी इसकी दर्द की वजह है। आमतौर पर शरीर के भार को वहन करने वाले जोड़ जैसे घुटने, कूल्हे, रीढ़ की हड्डी तथा पैर प्रभावित होते हैं। इसके कारण जोड़ों में काफी अधिक दर्द, अकड़न होती है और जोड़ों की गतिविधि सीमित हो जाती है।

आयुर्वेदिक दर्द निवारक काड़ा क्या हे और क्यों लेना क्यों जरुरी हे। ?

घुटने और जोड़ो के दर्द के लिए आयुर्वेदिक दर्द निवारक काड़ा चूर्ण रामबाण इलाज़ हे, यह बना हे उन साडी आयुर्वेदिक औषधियों से जो जोड़ो के पुराने से पुराने दर्द को हमेशा के लिए ख़त्म कर देता हे इस काढ़ा का उपयोग शुरू करते ही जोड़ों में साइनोबियल फ्रलूड (जोड़ो के बिच की चिकनाहट) की मात्रा बढ़ने लगती हे और उपास्थि (कोमल हड्डी) भंग हुयी हो जो गद्दे की तरह होती है उसको फिर से जोड़ने और उसकी रक्षा करने लग जाता हे और क्रियाकलाप को सहज बनाता है।

और आपकी हड्डियाँ एक दूसरे के साथ रगड़ खाना बंद करदेती हे साथ ही tendons और ligaments को मजबूत बनाने anti-inflammatory गुणों के साथ रक्त परिसंचरण को बढावा देने और हड्डियों और जोड़ों को मजबूत करने में मदद करती है | जीससे दर्द, सूजन और ऐंठन कम होकर हमेशा के लिए ठीक हो जाती है और शरीर के दूसरे अंग भी इससे प्रभावित होने से बच जाते हे जैसे कि हृदय, पेशियाँ, रक्त वाहिकाएँ, तंत्रिकाएं और आँखें। आयुर्वेदिक दर्द निवारक काड़ा चूर्ण मात्र 1 सप्ताह में आपको घुटने, जोड़ो के दर्द में आराम देना शुरू करता हे और अगर मांसपेशियों में भी खिंचाव महसूस होता है तो वह भी जाता रहता है।

हड्डियों और जोड़ों के दर्द के लक्षण हैं-

  • चलने, खड़े होने, हिलने-डुलने और यहां तक कि आराम करते समय भी दर्द
  • सूजन और क्रेपिटस
  • चलने पर या गति करते समय जोड़ों का लॉक हो जाना
  • जोड़ों का कड़ापन, खासकर सुबह में या यह पूरे दिन रह सकता है
  • मरोड़
  • वेस्टिंग और फेसिकुलेशन

जब खास करके हमारे घुटने सही काम नहीं करते तो हमें चलने फिरने आदि में दिक्कत हो जाती है और घुटनो को मोड़ने और सीधे करने में भी बहुत दिक्कत होती है। घुटनो पर लालिमा व सूजन बनी रहती है। इस कारण से घुटनो को मोड़ते समय चटकने व टूटने जैसी आवाज आने लगती है। जिससे घुटने में दर्द होता है उन पैरो में झुनझुनी होने लगती है। आर्युवेद मे घुटनो में होने वाले दर्द से बचने के लिए सबसे अचूक उपाय आयुर्वेदिक दर्द निवारक काढ़ा चूर्ण है। जिससे आपके घुटनो कमर और जोड़ो के दर्द को कम ही नहीं करता बलिकी आपके दर्द को जड़ से ख़त्म कर देता है।

औषधियां

अमृता सत्व, गोदंती भस्म, प्रवाल पिष्टी, स्वर्ण माक्षिक भस्म, महावत विध्वंसन रस, वृहद वातचितामणि रस, एकांगवीर रस, महायोगराज गुग्गुल, चंद्रप्रभावटी, पुनर्नवा मंडुर इत्यादि

घुटनों के दर्द के निम्नलिखित कारण हैं-

  • आर्थराइटिस- लूपस जैसा- रीयूमेटाइड, आस्टियोआर्थराइटिस और गाउट सहित अथवा संबंधित ऊतक विकार
  • बरसाइटिस- घुटने पर बार-बार दबाव से सूजन (जैसे लंबे समय के लिए घुटने के बल बैठना, घुटने का अधिक उपयोग करना अथवा घुटने में चोट)
  • टेन्टीनाइटिस- आपके घुटने में सामने की ओर दर्द जो सीढ़ियों अथवा चढ़ाव पर चढ़ते और उतरते समय बढ़ जाता है। यह धावकों, स्कॉयर और साइकिल चलाने वालों को होता है।
  • बेकर्स सिस्ट- घुटने के पीछे पानी से भरा सूजन जिसके साथ आर्थराइटिस जैसे अन्य कारणों से सूजन भी हो सकती है। यदि सिस्ट फट जाती है तो आपके घुटने के पीछे का दर्द नीचे आपकी पिंडली तक जा सकता है।
  • घिसा हुआ कार्टिलेज (उपास्थि)(मेनिस्कस टियर)- घुटने के जोड़ के अंदर की ओर अथवा बाहर की ओर दर्द पैदा कर सकता है।
  • घिसा हुआ लिगमेंट (ए सी एल टियर)- घुटने में दर्द और अस्थायित्व उत्पन्न कर सकता है।
  • झटका लगना अथवा मोच- अचानक अथवा अप्राकृतिक ढंग से मुड़ जाने के कारण लिगमेंट में मामूली चोट
  • जानुफलक (नीकैप) का विस्थापन
  • जोड़ में संक्रमण
  • घुटने की चोट- आपके घुटने में रक्त स्राव हो सकता है जिससे दर्द अधिक होता है
  • श्रोणि विकार- दर्द उत्पन्न कर सकता है जो घुटने में महसूस होता है। उदाहरण के लिए इलियोटिबियल बैंड सिंड्रोम एक ऐसी चोट है जो आपके श्रोणि से आपके घुटने के बाहर तक जाती है।
  • अधिक वजन होना, कब्ज होना, खाना जल्दी-जल्दी खाने की आदत, फास्ट-फ़ूड का अधिक सेवन, तली हुई चीजें खाना, कम मात्रा में पानी पीना, शरीर में कैल्सियम की कमी होना।

जोड़ो के दर्द में क्या नहीं खाये

शिमला मिर्च, अत्यधिक नमक, बैगन दही, लस्सी, अचार, दूध्, चाय तथा , रात के समय चना, भिंडी, अरबी, आलू, खीरा, मूली, राजमा इत्यादि का सेवन भूलकर भी नहीं करें।

ध्यान रखने योग्य:

  • इन बातो का ध्यान रखे
  • घुटनो की गर्म व बर्फ के पैड्स से सिकाई करे।
  • घुटनो के निचे तकिया रखे।
  • वजन कम रखे इसे बढ़ने न दे।
  • ज्यादा लम्बे समय तक खड़े न रहे।
  • सुबह खली पेट तीन से चार अखरोट खाये, विटामिन इ युक्त खाना खाये धुप सेके।
  • मालिश करने से जोड़ों के दर्द को आराम मिलता है, मालिश लसुन के तेल, सरसों के तेल या नारियल के तेल से हल्के हाथो से करें

सेवन की विधि.

यह आप सुबह खाली पेट या भोजन के कम से कम दो घंटे के बाद लीजिये.

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